मोबाइल जुग......... जैमें सौंसे खन्दान डुबलों रहै है । माय थकी के ऐतै, कहते..... 'जल्दी खो आरो सूतें, भोरहैं फेरू उठनो छै कामो लेली ।' के बच्चा के खिस्सा कहतै, बचपन तें जेना बिलाय गेलै, खाली पीठी पॅ दस किलो के बोझो किताब ..... बस ! घरो से लैकें बाहर तक बच्चा के मनों के समझै के केकरो फुर्सत नै छै, कैन्हें कि जुग मशीनों के होय गेलै, आदमियो मशीन होय गेलै । एहना में डॉ. अमरेन्दर सर ने ई उपन्यास लिखी क बहुत अच्छा काम करने छै, कम-से-कम उपन्यासो पढ़ी के तें बच्चां भारत के ढेरे नही, पहाड़, वॉन के जानकारी हासिल करी लेते । उपन्यास के भाषा-शैली एतनै सुन्दर है कि बड़को पढ़ते-पढ़ते बच्चा होय जाय एकदम जीवंत, कटियो टा बनावटी नै, बच्चां हँसते-खेलतें मजा लै लै कॅ पढ़ते । छै I आबे देखों डॉ. अमरेन्दर सर के सबसे बड़का मुद्दा छिकै जीते जीं अंग आरो अंगिका के सम्मान दिलाना आरो आगू बढ़ाना, से हुनी यै उपन्यासों के जरियां आबैबला पीढ़ी के है धरोहर देने छै कि अंग प्रदेश में की की है। कोशी, दामोदर, चीर, चानन, बराकर मयूराक्छी सब नही अंग प्रदेश से ही निकलै छै । बाला-बिहुला कहानी, बटेश्वर धाम, नालंदा विश्वविद्यालय, मंदार पर्वत सब अंग के धरोहर छेकै । चंपानगर भागलपुर के चाँदो सौदागर एतना बड़ों व्यापारी रहे कि विदेशों से व्यापार करै छेलै । दुनिया में सबसे बड़ों रेशम के व्यापार अंग प्रदेश से ही होय छेलै, आइयो भागलपुर के रेशम नगरी ही कहलों जाय छै । हम अंग प्रदेश के सौदागरें विदेशों से पाक शिराज घोड़ा लानलकै । 'हीरामन तोता' जें आदमी के मनों के बात बिना बतैन्हें जानी जाय छेलै, वोहो अंग देश के ही छेलै । मंजूषा कला की छेकै, एकरा में कै रंग लागै छै, कहाँ से शुरूआत होलै, है सब कतें बच्चा कें पता है ? कर्ते मांय जानै छै कि हमरों अंगदेश में, घड़ियाल, बोचों, गेंडा सब जीव छेलै जेकरों लोप होय गेलै । मछली कतें तरहों के होय छै आरो हमरा अंगदेशों के नहीं में कोन कोन मछली होय छै, के जानै ८० सात समुन्दर तेरह नद्दी |
Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/80
Appearance