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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/65

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रहें । जब देवदूतें दोबारा पुछलकै, तें वैं कोकड़ी खुजलैतें बोललै " माय तें बस वहीं तक खिस्सा कहलें छेलै कि घोड़ा राजा के लेलें मालुकाद्वीप पहुँची गेलै, जेकरों साथ हीरामन सुग्गाह उड़ते जाय रहलों छेलै ।" “तें, तोरा मालुकाद्वीप के बारे में बतैय्यौ, ओकरों पहिले, तोहें आगू के खिस्सा सुनै लें चाहभौं ?" "ई बात तें तोरा रस्ता है में हम्मे बोलैवाला छेलियौं, काका; मतुर ओतें - ओतें सुन्दर नदी, पहाड़ आरो रंगीन मछली के खिस्सा में ई बाते हमें भूली गेलियै, कि मलुकाद्वीप पहुँचला के बाद की होलै ? आबे पहिलें वही सब सुनाय दा ।” आरो एतने बोली दुक्खी दोनों जाँघ जोड़तें, दायां ठेहुनिया पर दायां केहुनियां जमैतें देवदूत के आँखी दिस मुँह करी लेलें छेलै । ई देखी के देवदूतें सफेद रं चिकनों पत्थल पर बायां केहुनियां मैले छेलै आरो तलहत्थी पर फेनु से माथा जमैतें दोनों गोड़ लंबा करी लेलें छेलै, ताकि दुक्खी के ठीक बरोबर होय जाय । तबें तें दुक्खियो अपनों दोनो केहुनी, दोनो ठेहुनियां पर जमैतें कलाई के सटलों दू पत्ता नाँखी फैलाय लेलें छेलै आरो वै पर ठुड्डी जमैतें कहलकै, “आबें सुनावों ।" देवदूतें एक दाफी नीचें दिस देखलें छेलै, फेनु अंगुरी से संकेत करतें कहले छेलै, “कभियो वही ठां मालुकाद्वीप होय छेलै, मतुर वहाँ पर आबें सुवनसिरी नदी बही रहलों छै ।" "ई द्वीप की होय है, काका ?" " जेना हजारो साल पैहिले बौंसी छेलौं । कहै के मतलब है, जेकरा चारो दिस सागर लहरैतें रहें दूध-दहीवाला सागर नै, गंगा - कोशी हेनों सागर, तें ऊ जग्घों द्वीपे कहतै । बुझलौ ?" "31755551" । "हुन्ने हौ देखो, ऊ द्वीप छेकै; एकरा लोंगे मांजुली द्वीप कहै सात समुन्दर - तेरह नही ६५