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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/60

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तीनो में हम्मी छोटों, जेना मटर मे राय गोटो

हमरों की औकात छै

भैय्या के की बात छै

हिन्नें दूध दुहावै छै, हुन्नें से सब आवै छै

कोय गार, कोय गरम - गरम, पीये गटगट करै हजम

जब तक आवौं टुघुर-टुघुर

पीते देखौं टुकुर-टुकुर

दे की ? तें चिढ़ा है, गुस्सा केन्हों बढ़ावै छै

जानर्थै छै, यें करते की ? टानी लै छै दूध-दही

हमरों माय, गाय माय

कहना है तोरा कुछ आय

सबके माय कहावै छौं, कतें तोहें सुहावै छो

मैय्यो में तोहें उच्चों, पूँछों तोहरों ने बच्चों

गोरों-गोरों देह केहनों

सुद्धी छों हमरे जेहनों

सबटा दूध दुहाय दै छौ, है नै लेरु पिलाय दै छौ

हमरौ तें तोहें मानथेँ छौ, हालो सबटा जानथैं छों

चुरु भरी नै दूध मिलै

खाय वक्ती नै जीभ हिलै

मैय्यो उल्टे डाँटै छै, बड़कै में सब बाँटै छै

आबें एक ठो तोहरे आस, यही विचारी ऐलौं पास

लेरु जरा हटावों नी

हिन्नौ दूध बढ़ावौ नी

देखों बाटी आनले छी, पानी में रोटी सानले छी

रोटी दूध सें सानी जा, एतना टा तोहें मानी जा

तोहरे किरिया जों जैभौं

घुरी- फिरी के नै भौं ।

कविता सुनी-सुनी के देवदूत खिलखिलैतें रहलै आरो आखरी