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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/58

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"ते, महा सागर की सात गो होय है ?"

" नै । सात तें बस सागर होय छै । जेकरों बारे में बात होय छै।"

"तें की तोहें ऊ सात सागर के बारे में बतावें पारों, काका ? हुऍ सकै छै, ऊसात सागर, वही सागर होतै ।"

दुक्खी के आँखी में प्रश्न साथै जिज्ञासो आरो घन्नों होय गेलों छेलै, जेकरा गमतें हुऍ देवदूतें सात सागर के बारे में जल्दी बताना है ठीक बुझलकै, तें कहें लागले, "तोहें मनु के नाम सुनलें छौ ? नै सुनलें होभी, तें कोय बात नै । बस यही समझों कि ई धरती पर हुनी पहलों आदमी छेलै, जिनकों बादे आरो- आरो आदमी के जनम होलै । ठीक छै ? तें, मनु के सबसे बड़ों बेटा के नाम छेलै - प्रियव्रत । हुनी एक दाफी पृथ्वी के चक्कर लगाय के बात सोचलकै आरो हुनी हेनों करवो करलकै - वहू कि एक दाफी नै, सात दाफी रथ पर बैठी के पृथ्वी के चक्कर लगैलकै । तें सात दाफी चक्कर लगाय में जहाँ-जहाँ रथ के चक्का से गड्ढा बनलै, वहाँ-वहाँ सागर बनी गेलै । "

“की है सच छेकै, काका ?"

" पुराण तें हेने कहै छै ।"

“तें, हौ सब सागर अपने देशों में छै आरो हिन्ने - सब पूरबे दिश ?" दुक्खी के जिज्ञासा खुब्बे बढ़ी गेलों छेलै ।

“नै- नै, हेनों बात नै छै । ई पृथ्वी तें बहुत बड़ों है, अपनों देश ओकरों एक हिस्सा छेकै । तोहें जोन खिस्सा के सात सागर के बात करी रहल छौ, हौ दुसरों सागर छेकै ।"

" हौं, कोंन सागर छेकै, काका ?"

" सब बात बतैौ । चलो हमरा सिनी आयकों रात नागालैंड के पर्वते पर बितायौं । एतें ऊपर से नद्दी के देखवों आरो एकदम नगी से देखै में अंतर ते होवे नी करै छै । बतैलो आरो देखलों में जमीन आकाशवाला अंतर होय है ।"

" एकदम चलों ! आय रात वही पहाड़ों पर रहलों जैतै ।"