"बराकर ।"
"आठ ।"
" बेहुला ।"
"नौ ।”
" तीस्ता ।"
"दस ।"
" बह्मपुत्र ।"
“ग्यारह ।” देवदूतें हैरत से दुक्खी दिस देखलें छेलै ।
" सुवनसिरी । "
“ बारह | गजब के स्मृतिशक्ति राखै छौ । वाह !"
“धनसिरी ।"
"" तेरह ।” आरो देवदूतें प्रसन्नता से ताली पीटी के आपनों खुशी जाहिर करलें छेलै ।
दुक्खी तेरह नदी पार करी चुकलों है, ई बात जान हैं दुक्खी कुछ उदास रं दिखलै ।
" कैन्हें की बात हो - तोहें हठाते हेनों गुमसुम कैन्हें होय उठलौ ? की बात है ?” ओकरों चेहरा देखी के देवदूतो कुछ परेशान होय उठले, फेनु बोलले, “बोलों दुक्खी बाबू, हेना की हेरी रहलो छौं ?"
"देवदूत काका, हम्मे तेरह नदी पार करी चुकलियै नी ?"
"तोहीं नी अभी गिनी के बतैलौ ।”
"तें, एकरों बादे की सात समुन्दर के बारी ऐतै ?"
"हेनों के बतलैलकौं, एकरों बाद तें म्यांमार देश छै, जेकरा हमरा सिनी बर्मा देशो के नाम से जानै छियै आरो ओकरों बाद समुद्र नै, महा समुद्र शुरू होय जाय छै ।"
"तें, की समुन्दर आरो महा समुन्दर में अंतर होय छै ?"
"होय है नी । तोहें सागर के बहुत बड़ों - बड़ों झील समझें पारों आरो महा सागर तें दूर-दूर तांय बस पानिये - पानी । "