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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/53

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यहाँकरे लोग नै, सौंसे देश के लोग बीहू कहै छै ।" ई कही के देवदूत आरो नीचें उतरी गेलै, जहाँ सें ऊ नाच-गान साफ-साफ देखलों जावें पारे ।

"हेनों नाच-गान तें हमरों बौंसी में होय छै, मतर ऊ माघ महीना में । मंदार पर्वत के नीचें वनवासी सिनी छोटो छोटों लंबा रं ढोल बजाय छै आरो जनानी सिनी गोलाई में मूड़ी - डाँड़ों झुकाय-झुकाय केँ नाँचते रहै छै । हमरा हर साल बाबू वहाँ लै जाय है- बौंसी मेला देखाय लें । ऊ नाच-गान में वंशियो बजै छै ।"

“सब जग्घों के वनवासी के नृत्य-गान बहुत कुछ एक्के किसिम के होय है, तब अलग-अलग स्थानों पर कुछ-न-कुछ तें भेद होवे नी करै छै, दुक्खी बाबू । तोरों बौंसी मेला में जे वनवासी सिनी नृत्य करतें होथौं, वैमें वंशी साथै मानर के भी संगीत लहरैतें होथौं । अबकी संक्रांति में जइयौ, तें गौर से सुनियों । अभी है जे नाच-गान

जोन नदी के किनारी होय रहल छै, जानै छौं, हौ कौन नही छेकै ?" " गंगा है नदी के कोय धार होतै नी ।"

"नै दुक्खी बाबू, नै; ई ऊ महानदी छेकै, जेकरा हमरा सिनी ब्रह्मपुत्र नदी के नामों से जानै छियै ।"

" ओऽऽऽ, अच्छा; यहा बह्मपुत्र नदी छेकै । माय बोलै छै कि ई सीधे देवता के घरों से निकलै छै ।"

" माय बोलै छौं, तें झूठ केना हुऍ पारें । अपनों यहाँ अधिकांश नामी नदी के साथ हेने धार्मिक मान्यता जुड़लों है । जॉन तीस्ता नदी कें अभी देखलौं, ओकरों बारे में यहा लोकमान्यता है कि ऊ देवी पार्वती के हृदय से निकलै छै जेना ई ब्रह्मपुत्र भगवान शिव के घरों सें । पुराण से शिव ब्रह्म छेकै, महा देवता आरो हुनको निवासस्थान छेकै कैलाश पर्वत - वहा पर्वत पर मानसरोवर झील है, जैठां से ई नदी निकलै छै - यही लें ई ब्रह्मपुत्र कहावै छै । "

" ओऽऽऽ । ई मानसरोवर कोन देश में पड़े छै ?"

" तिब्बत मे छै ।"