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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/26

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दुक्खी के हेनों लगी रहलों छेलै कि ओकरा नींद आवी गेलों छै, तहियो वैं सब कुछ देखी रहलों छै- देखी रहलों छै कि देवदूत उजानी नगर के ऊपरे ऊपर चक्कर मारी रहलों छै, ओकरा सें बताय रहलों है कि यही ठां बिहुला देवी के पिता वासु सौदागर के महल छेलै, यही ठां ऊ कदमों के गाछ छेलै, यही ठां है विशाल पोखर छेलै, जेकरों किनारी पर बिहुला देवी ने लोहा के कलाय दाल के देवी विषहरी के कृपा से गलैले छेलै आरो दुक्खी के फेनु यही लगलों छेलै कि किसिम-किसिम के चिड़ियाँ सिनी चुनमुन हुऍ लागलों छै, तें देवदूत उजानी नगरी से हटी के पूरब दिस बढ़ें लागलों छै ।

ओकरों नीन एकदम से चॉक होय गेलै । ऊ रात भरी सुतलों छेलै, मतुर सौंसे रात ओकरों मनों में कागासैनी घाट, गोदा घाट, गोकुला घाट, सेमापुर घाट, गलतंत्री घाट के बात सिनी घुर हैं रहलों छै । देवदूत के उड़े के गति से बेखबर दुक्खी ओकरा से कहलकै, " हमरा बिहुला माय के कहानी सुनतें डरो लागै छै, वैमें एक टुन्नी राकसिन होय छै, जे आदमी के जीतें निगली जाय छै... |"

अभी ऊ आगू कुछ आरो बोलतियै कि हठासिये चीखी पड़लै । देवदूतें हवा के बीच रुकते हुए पुछलकै, “कैन्हें, की होलौं ? कैन्हें चीखी पड़लौ ?"

तें, सहमलों दुक्खी औंगरी से नीचें जंगल में बुलतें एक जानवर दिस इशारा करते बोलले, “हौ देखों, काका - टुन्नी राकसिन के बेटा बुली रहलों छै ।"

देवदूतें नीचें जंगल दिस देखलकै, तें खिलखिलाय पड़लै । फेनु हँसी के रोकतें बोलले, “अरे नै- नै, ऊ टुन्नी राकसिन के बेटा नै, ऊ तें अरना छेकै ।"

दुक्खी के भय कम होलै, तें पुछलकै, “ई अरना की होय छै,