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Page:Saat Samundar Terah Naddi (Dr. Amrendra).pdf/25

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छेलै, जबें कबूतर आरो सुग्गा है सनेश नै पहुँचावै छेलै, कागौ सनेश पहुँचावै छेलै । दुक्खी बाबू, मांय ते तोरा बिहुला देवी के कहानी सुनैले छौं, तें बतैलें होथौं कि बिहुला देवी के मंजूषा जबें गंगा नदी में बहतें - बहतें कागासैनी घाट पहुँची गेलै ... ।”

“हौं, हमरा याद छै, आरो मांय यहु बतैलें छेलै कि कागा के सरदार अपनों सेना, दल-बल लेलें मरलों बाला पर झपटी पड़लै ।"

“ठीक बोललौ, दरअसल करियर मांसभक्षी बेसी होय छै, आरो कागासेनी घाट कभियो बहुत बड़ों मसान से सटलों छेलै, कोय लहास आवै, तें सौ-सौ कागा लहास पर टुटी पड़ै, से बिहुला के मरलों स्वामी बालाह पर टूटी पड़लों छेलै ।”

देवदूतें देखलकै, दुक्खी एक दाफी भय से काँपी गेलों छै, मतर अपना पर काबू पैतें कहलकै, “मांय बतैलें छेलै कि बिहुला देवी ने ओकरों दिस दूध-लावा फेंकी के ऊ कागा सेना के शांत करी देखें छलै ।" ई कहतें दुक्खी के चेहरा पर एक नया किसिम के संतोष उतरी ऐलों छेलै ।

" ठीक तें बतैलें छेलौं” देवदूतें अपनों उड़े के गति होलकों करतें कहलकै, "तोहें जाने छौ, तबें ऊ देवीं अपनों सोना, चाँदी के आभूषण पोटरी से निकाली के कागा के सरदार के देलकै आरो कहलकै, कि हे कागा भाय, यैठां से दू कोस दूर में उजानी नाम के एक गाँव है, वही हमरों नैहर छेकै । हमरों घरों के निशानी ई छेकै कि दुआरी पर कदम फूल के गाछ छै । वही गाछी पर तोहें बैठी के उचरियो, तें कोय-न- कोय घरों से निकलतौं, माय, भाय आकि बाबू - तबें तोहें ई आभूषण दैकें हमरों सब हाल बताय दियौ ।” ई कहते-कहतें देवदूत कुछ देर लेली चुप होय गेलै आरो तुरते अपनों उड़े के गति तेज करी देल छेलै ।