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Page:Banta (Dr. Amrendra).pdf/85

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सुनैला के बाद बड्डी गौरव के साथ कहने छेलै, "की समझलौ, आबें बण्टा के सरकारें पढ़ेंतै । सरकारे के पैसा पर ऊ पटना जैतै, दिल्ली जैतै, लन्दन जैतै । आरो तोहें जानिये लेलौ कि कथी लें बण्टा के सरकार है सुविधा दे रहल छै । पूरे कदरसी - डोमासी के बण्टा जे र आपनो साथी संगें मिली के स्वर्ग बनाय देलकै, वह लें । पचरासी, ई काम तें आजादी पैला के बाद, नेहरु सें लैकें आपनों झुट्टा सांसद आरो विधायको ने करें पारलकै । डपोर संख रं बाजी लौ कत्तो ।"

पचरासी तें खुशी से कुछ बोल्दै नै पारी रहलॉ छेलै । की बोलतियै ऊ । वैं तें अभी तांय के ई जिनगी में कभी है बात सपन्हौं में नै सोचले छेलै । जो सोचले छेलै, ते एतने टा कि बण्टा चार अक्षर पढ़ी लै छै, तें बारह नम्बर गुमटिये पर कोय मनिहारी के दुकान खोलवाय देवै, नै घरों में दिऍ पारतै तें नै, आपनों जेब तें चलैते ।

"अरे, सोचें की लागली । ई सपना के बात नै छेकै । अखबारों में छपलों बात छेकै । अखबारो झूठ हुऍ पारें, मजकि हम्में तें भागलपुर कमिश्नरी से लैकें पटना तक पूछी लेलें छियै । एकदम सच - सच बात छेकै ।" ई कहतें चौधरी कां आपनों जेबी में हाथ डाली के सब टा चौकलेट निकालले छेलै आरो पचरासी के दायां तरहत्थी आपनों बायां तरहत्थी पर धरतें, वै पर सब चॉकलेट राखी देलकै, ई कहतें कि, “है खाली बण्टू वास्तें छेकै । हमरों दिश सें दै दियौ । पता नै ऊ कखनी लौटें, ने तें हम्मी आपनों हाथों से देतियै । है रं पूत तें घरों घरों में हुऍ । "

कहते-कहतें हुनी एकदम गंभीर होय उठलो छेलै आरो जेन्हैं लौटे लें घुमले, ओन्डै के फेनू पचरासी दिश होतें बोलले, “आरो सुनों, बण्टू पुरस्कृत तें होतियै भिट्टिये में, मजकि मॉर- मिनिस्टर से पैरवी करी कॅ ऊ स्थान बदलवाय के हम्में भीखनपुर करवाय लेलें छियै । आबें कालिये थानवाला इस्कूली में सबटा मोर- मिनिस्टर, डी. एम. कमिश्नर ऐतै । सरकार सें कहीं देलियै कि बण्टू के माय के मॉन बहुत खराब छै, से सब बातों के देखतें हुऍ ई समारोह भीखनपुरे में हुऍ । डी. एम., कमिश्नरें मानियो लेलकै । आरो एक बात, ई कार्यक्रम अगले महिना के पहिलकों मंगलवार के होना है । यहू सबकेँ कही दियौ । से तें अखबार में ई सब