दिल-दिमाग गौरव सें गनगन करें लागलै । खुशी में वैं वहें मोखला छड़ी लै आनलकै आरो सोर करलो भुरभुरो जमीन पर यहाँ से वहाँ तक लिखना शुरु करलकै,
१. हम्में आपनों पढ़ाय आरो काम पूरा निष्ठा से करवै आरो महान बनवै ।
२. आय से हम्में, कम-से-कम दस अनपढ़ लोगों के पढ़े लिखे लें सिखैबै ।
बण्टां टू के बाद तीन तें लिखलकै, मतरकि ओकरों बाद कुछ लिखलकै नै । अभी तांय ऐड़िया बल्लों ऊ जे उछली- उछली लिखले जाय रहल छेलै, रुकी गेलै आरो पालथी मारी सोचें लागले, “अभी तांय यह दू काम तें होल छै । वैं बिल्टू दा सें जे-जे सिखलकै हौ सबटा, भोलू, गणेशी, मुकुटनाथ, गिदरा, अनारसी, अजनसिया, खोको, चम्मो, हिरदा, वैष्णव आरो गन्हौरी के सिखेलें छै । आबे यै सिनी हमरा से दुए पैसा कम जानै छै । कल यहू सब महान बनते, जेन्हों हमें आपना लें सोचै छियै । मतरकि पहले हमरा महान बनना है ।" आरो फेनू छड़ी एक दिश राखी के बण्टा बैठले - बैठले दोनों हाथों के तीरतें पीछू तांय लै जैतें आपने - आप बोललै, "एते बड़ों महान ।”
आरो ओकरों मॉन एकदम सें गनगनाय उठलै । जन्हें तेजी सें वैं आपनों दोनों हाथ पीछू करले छेलै, ओहैं तेजी से वैं झबझब, सबटा लिखलों दोनों हाथों सें मेटाय के, घोर दिश चिड़िये नांखी फुर्र होय गेलै । घोर ऐलै ते आपनों वस्ता खोली के एक कॉपी निकाललकै आरो ओकरा बीचे बीच खोललकै । बड़ी मनों से अखबार के एक टुकड़ा, जे कॉपी के एक पन्ना से साटी देला गेला छेलै, पर अंगुरी के ऊपर से नीचें तांय हौले-हौले ले जैतें मने - मन वाक्य सिनी पढ़तें गेलै, फेनू आँख मुनी के सिहारतो गेलै ।
औंगरी के ऊपर से नीचें तांय लै जाय आरो आँख मुनी के सिहारै में दस मिनिट से कम नै लागलों होते । एकरों बाद कॉपी के बंद करी नो किसिम सें बस्ता में रखी देलकै जेना कोय बूढ़ी - पुरानी जनानी रामायण के पढ़ी ओकरा कपड़ा में लपेटी के ताख पर राखै छै ।