हनुमान आरती

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यह आरती रामानुजाचार्य की शिष्य परंपरा में चौदहवीं पीढ़ी के संत कवि रामानंद द्वारा रचित है । रामानंद ने राम की सगुण भक्ति पर बल दिया । रामानंद के शिष्य कबीर, रैदास, पीपा, धन्ना इत्यादि थे।

मूल पाठ[edit]

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥१
जाके बल से गिरिवर काँपै। रोग-दोष जाके निकट न झाँपै॥२
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥३
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सीय सुधि लाये॥४
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥५
लंका जारि असुर सँहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥६
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥७
पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥८
बायें भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥९
सुर नर मुनि आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे॥१०
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥११
जो हनुमान जी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परमपद पावै॥१२
लंक विध्वंस किए रघुराई। तुलसिदास प्रभु कीरति गाई॥१३

अग्रेजी भाषान्तर[edit]

English transliteration

1. Aarti KiJe Hanuman Lala Ki, Dushtdalan Ragunath Kala Ki

2. Jake Bal Se Girivar Kaanpai, Rog-Dosh Jake Nikat Na Jaanpai

3. Anjani Putra Maha Baldaaee, Santan Ke Prabhu Sada Sahaaee

4. De Beera Raghunath Pathaaye, Lanka Jaari Seey Sudhi Laaye

5. Lanka So Kot Samundra Si Khaaee, Jaat Pavansut Baar Na Laaee

6. Lanka Jaari Asur Sanhare, Siyaramji Ke Kaaj Sanvare

7. Lakshman Moorchhit Pade Sakaare, Aani Sajeevan Pran Ubaare

8. Paithi Pataal Tori Jam-Kaare, Ahiravan Ki Bhuja Ukhaare

9. Baayen Bhuja Asur Dal Mare, Dahine Bhuja Santjan Taare

10. Sur Nar Muni Aarti Utaare, Jai Jai Jai Hanuman Uchaare

11. Kanchan Thaar Kapoor Lau Chhaaee, Aarti Karat Aajana Maaee

12. Jo Hanuman (ji) Ki Aarti Gaavai, Basi Baikunth Parampad Paavai

13. Lank Vidhvans Kiye Raghurai, Tulsidas Prabhu Aarti Gaaee

संबंधित कड़ियाँ[edit]

  1. हनुमान चालीसा
  2. संकटमोचन हनुमानाष्टक
  3. बजरंग बाण
  4. हनुमत् स्तवन
  5. राम वन्दना
  6. राम स्तुति
  7. रामावतार

बाहरी कडियाँ[edit]