आरती संग्रह

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<div class="verse"> <pre> जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा . माता जाकी पारवती पिता महादेवा .. एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी . पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा .. अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया . ' सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .. _____________________________________________________ </pre> </div> [[ओम जय जगद