ॐ नमः भगवते वासुदेवाय - महामन्त्र
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श्री विष्णु पुराण में ध्रुव जी का कथा का वर्णन है । उस में भगवान हरि की भक्ति का उपाय यह महा मन्त्र बताया गया है ।
हिरण्यगर्भ पुरुष प्रधान अव्यक्त रुपिणे । ॐ नमः वासुदेवाय शुद्ध ज्ञान स्वरूपिणे ।।
भगवान पर ध्यान करते हुये इस महामन्त्र का उच्चारण करना चाहिये । ॐ नमः भगवते वासुदेवाय ।
हिरण्यगर्भ - ब्रह्मा जी पुरुष प्रधान - पुरुष (आत्मा) औऱ मूल प्रकृति अव्यक्त रुपिणे - अदृष्य, सूक्ष्म शुद्ध ज्ञान स्वरूपिणे - जिन्हें शुद्ध ज्ञान द्वारा देखा जाता है
भगवान हरि जी को प्रणाम है ।

