ॐ नमः भगवते वासुदेवाय - महामन्त्र

From Wikisource

Jump to: navigation, search

श्री विष्णु पुराण में ध्रुव जी का कथा का वर्णन है । उस में भगवान हरि की भक्ति का उपाय यह महा मन्त्र बताया गया है ।

हिरण्यगर्भ पुरुष प्रधान अव्यक्त रुपिणे । ॐ नमः वासुदेवाय शुद्ध ज्ञान स्वरूपिणे ।।

भगवान पर ध्यान करते हुये इस महामन्त्र का उच्चारण करना चाहिये । ॐ नमः भगवते वासुदेवाय ।

हिरण्यगर्भ - ब्रह्मा जी पुरुष प्रधान - पुरुष (आत्मा) औऱ मूल प्रकृति अव्यक्त रुपिणे - अदृष्य, सूक्ष्म शुद्ध ज्ञान स्वरूपिणे - जिन्हें शुद्ध ज्ञान द्वारा देखा जाता है


भगवान हरि जी को प्रणाम है ।

Personal tools